आ अब पुराने खान पान पर लौट चले
अब फिर से समय ने करवट ली और अब डॉक्टर्स की भाषा धीरे धीरे बदलेने लगी है , अब फिर से सरसो का तेल , देसी घी सब्ज़ी में तड़का लगाने के लिए रेकमेंड / सलाह दिया जा रहा है। आप इस खेल को समझने के कोशिश कीजिये। ये सारा फार्मा कम्पनीज का करा धरा है। ये कम्पनिया ही निर्णय करती है की डॉक्टर्स को क्या पढ़ाया जाये और ये उसी हिसाब से आगे अपने मरीजों को सलाह देते है। एक अंग्रेजी रिसर्च के अनुसार ये पाया गया की कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना एक सीमा तक कुछ भी खतरनाक नहीं है , शुगर का एक सीमा तक बढ़ना आसानी से काबू में किया जा सकता है। शुरू शुरू में बढ़ता ब्लड प्रेशर आसानी से खान पान बदल कर , प्राणयाम योग जीवन में डालने से आसानी से काबू किया जा सकता है। परन्तु इन सब बीमारियों में अंग्रेजी दवाई सिस्टम तुरंत जीवन भर के लिए दवाई खाने की सलाह देता है। धीरे धीरे दवाई की खुराक बढ़ती जाती है , एहि इन फार्मा/ दवाई बनाने वाली कंपनी का असली फायदा होता है। इन का बस चले तो ये हर एक आदमी को दवाई खाने के लिए मजबूर कर दे।
अगर खान पान को सुधारा जाये तो हज़ारो बीमारियों से बचा जा सकता है और जो हो गयी है उनसे छुटकारा पाया जा सकता है। आयोडीन नमक वाली रिसेर्च इतनी कमाल की नहीं थी जितनी बना दी गयी, पूरी दुनिया को इन कम्पनीज ने रेफन्द आयल खिलाया जो जहर के सामान है. गुड़ शक्कर की जगह चीनी ने ली.
अब समय है आदतों को सुधारा जाये। नमक सेंधा प्रयोग में किया जाये या आधा सेंधा आधा ीोडीनयुक्त दोनों मिला कर उसे किया जाये. . सब्ज़ी में सिरफ और सिर्फ देसी घी या सरसो , नारियल , टिल का तेल बहुत थोड़ी मात्रा में प्रयोग किया जाये। लाल मिर्च का प्रयोग जरूर करे , लाल मिर्च भी देसी घी और सरसो के तेल की तरह विदेशी दुष्प्रचार की शिकार हुयी है , इसमें बहुत ही ज्यादा गुण है ये एक नहीं अनेको रिसर्चो से साबित हुआ है , छाछ , लस्सी खाने के साथ दिन ामे जरूर ले। हमेश ये कोशिश करे के कच्चे फल और सब्ज़ी जरूर लिए जाये , बिना नमक - मसाला डाले। आदर्श भोजन वह यही जिसमे कर्रेब करीब आधा भोजन कच्चा हो. इस प्रकार के भोजन से अनेको बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है.
अब फिर से समय ने करवट ली और अब डॉक्टर्स की भाषा धीरे धीरे बदलेने लगी है , अब फिर से सरसो का तेल , देसी घी सब्ज़ी में तड़का लगाने के लिए रेकमेंड / सलाह दिया जा रहा है। आप इस खेल को समझने के कोशिश कीजिये। ये सारा फार्मा कम्पनीज का करा धरा है। ये कम्पनिया ही निर्णय करती है की डॉक्टर्स को क्या पढ़ाया जाये और ये उसी हिसाब से आगे अपने मरीजों को सलाह देते है। एक अंग्रेजी रिसर्च के अनुसार ये पाया गया की कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना एक सीमा तक कुछ भी खतरनाक नहीं है , शुगर का एक सीमा तक बढ़ना आसानी से काबू में किया जा सकता है। शुरू शुरू में बढ़ता ब्लड प्रेशर आसानी से खान पान बदल कर , प्राणयाम योग जीवन में डालने से आसानी से काबू किया जा सकता है। परन्तु इन सब बीमारियों में अंग्रेजी दवाई सिस्टम तुरंत जीवन भर के लिए दवाई खाने की सलाह देता है। धीरे धीरे दवाई की खुराक बढ़ती जाती है , एहि इन फार्मा/ दवाई बनाने वाली कंपनी का असली फायदा होता है। इन का बस चले तो ये हर एक आदमी को दवाई खाने के लिए मजबूर कर दे।
अगर खान पान को सुधारा जाये तो हज़ारो बीमारियों से बचा जा सकता है और जो हो गयी है उनसे छुटकारा पाया जा सकता है। आयोडीन नमक वाली रिसेर्च इतनी कमाल की नहीं थी जितनी बना दी गयी, पूरी दुनिया को इन कम्पनीज ने रेफन्द आयल खिलाया जो जहर के सामान है. गुड़ शक्कर की जगह चीनी ने ली.
अब समय है आदतों को सुधारा जाये। नमक सेंधा प्रयोग में किया जाये या आधा सेंधा आधा ीोडीनयुक्त दोनों मिला कर उसे किया जाये. . सब्ज़ी में सिरफ और सिर्फ देसी घी या सरसो , नारियल , टिल का तेल बहुत थोड़ी मात्रा में प्रयोग किया जाये। लाल मिर्च का प्रयोग जरूर करे , लाल मिर्च भी देसी घी और सरसो के तेल की तरह विदेशी दुष्प्रचार की शिकार हुयी है , इसमें बहुत ही ज्यादा गुण है ये एक नहीं अनेको रिसर्चो से साबित हुआ है , छाछ , लस्सी खाने के साथ दिन ामे जरूर ले। हमेश ये कोशिश करे के कच्चे फल और सब्ज़ी जरूर लिए जाये , बिना नमक - मसाला डाले। आदर्श भोजन वह यही जिसमे कर्रेब करीब आधा भोजन कच्चा हो. इस प्रकार के भोजन से अनेको बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है.
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